विभांशु दिव्याल उफ सच का यह विकट तूफान यह कराल उफान, यह फेनिल सैलाब यह दहलावक नाद, दिशाओं को गुंजाता चीत्कार कानों को जमा देने वाला सच का यह हाहाकार सच का यह असीम अपराजेय वितान इससे पहले किसने कब बुना Read Original story
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