मैं लौटता हूँ हर शाम फिर इस कुर्सी परभरने उड़ान अपने अंतरिक्ष की ओरवहाँ मैं खाली कर सकता हूँ पर्चीयों से भरे झोले कोवहाँ सब कुछ उपस्थित हैनया पुराना एक साथवहाँ वर्तमान चाकू की धार नहींअंतहीन विस्तार Read Original story
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