तुम्हें दिल्लग़ी भूल जानी पड़ेगी

Posted on June 25th, 2008
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स्वर: नुसरत फ़तेह अली ख़ान
तुम्हें दिल्लग़ी भूल जानी पड़ेगी, मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो
तड़पने पे मेरे न फिर तुम हँसोगे, कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो
होठों के पास आये हँसी क्या मज़ाल है, दिल का मुआम Read Original story

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