स्वर: नुसरत फ़तेह अली ख़ान तुम्हें दिल्लग़ी भूल जानी पड़ेगी, मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो तड़पने पे मेरे न फिर तुम हँसोगे, कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो होठों के पास आये हँसी क्या मज़ाल है, दिल का मुआम Read Original story
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