कहीं जाति तो कहीं धर्म के झगड़ेकहीं भाषा तो कहीं क्षेत्र पर होते लफड़ेअपने हृदय में इच्छाओं और कल्पनाओं काबोझ उठाये ढोता आदमी नेउड़ने से पहले ही अपने पर खुद ही कतरेशहर हो गये हैं जैसे युद्ध के मैदानकि Read Original story
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