माया मिथ्या प्रतीत होती है पर वह सत्य है!

Posted on July 5th, 2008
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समर्थ रामदासजी का प्रतिदिन संध्या समय शिष्यों के साथ अध्यात्म-चर्चा का नियम था, जिसमें शिष्य उनसे गहन प्रश्न पूछते और वे उनका समाधानपूर्वक उत्तर देते थे! एक बार एक शिष्य ने उनसे प्रश्न किया – माया सत Read Original story

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