© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित! ओ हरजायी बादल तुम्हें देख रही हूं सालों से तुम्हें जान रही हूं सालों से झुक के गुजरते हो तो लगते हो अल्हड़ से मंडरा के निकल जाते हो तो लगते हो आवारा से छू कर मन को चले ज Read Original story
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